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बम्बई में छठ के धूम

ऐसे त भर दुनिया के हिंदुलो के तरह बिहारो में तमाम तरह के पर्व-त्योहार मनावल जाला बाकि एगो पर्व अइसन बा जेकरा के अगर बिहारी पर्व कहल जाव त गलत न होई... जी हां रउआ ठीक समझनी हम सूर्यषष्ठी यानी कि छठ के ही बात करतानी. छठ के महातम त सबका खातिर बहुत बा बाकी हमनी जइसन परदेसी लो खातिर एकर महातम तनी ज्यादा ही बा. इहे कारण बा कि हमनी भले गांव घर से दूर बानी स... बाकी छठी मइया अपना अंचरा से कबो हमनी के दूर न कइली. सन 2000 हजार में हम पहिला साल छठ के मौका पर घर से दूर रही... सच बताई .... भीतर से करेजा रोवत रहे. तब एगो संगी हमरा के एजा समंदर किनारे जुहू लेकर गइल. जइसे जुहू के नजदीक पहुंचे लगनीं... छठ वरतिया और उनकर संगी-साथी लो के भीड़ देखके मन धीरे-धीरे हलुक होखे लागल. जुहू बीच पर पहुंच के त एकदम से हम हरान रह गइनी... भीड़ लाखों में. बुझाते न रहे कि हम बिहार से कहीं बाहर बानी. चारों तरफ माहौल एकदम छठमय भइल रहे... खैर... वोकरा बाद से त जब भी छठ में बम्बई में रहेके पड़ेला तब जुहू गइला बगैर त कुछ भुलाइल जइसन लागेला. अबकी छठी मइया के कृपा से छठ में झारखंड अपना घरे जाएके मौका मिलतआ... घरे जाएके खुशी त बा...

छठी मइया के गीत

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पुजीला चरण तोहार पुजीला चरण तोहार ऐ छठी मइया दुखवा से करदअ उबार ऐ छठी मइया... नरियवा नरियवा जे फरेला घवद से ओ पर सुगा मेड़राय सुगवा के मरबो धनुष से सुगा गिरे मुरझाय रोवें सुगा के सुगनिया सुगा काहे मारल जाए रखियों हम छठ के बरतिया आदित होइहें सहाय दीनानाथ होइहें सहाय सूरूज बाबा होइहें सहाय (छठी मइया के इ गीत अगर भोजपुरिया लोक गायक मनोज तिवारी के आवाज़ में सुने के होखे त एहिजा क्लिक करीं.)

भोजपुरी भजन

सुरीला भोजपुरी भजन सुने के होखे त एहिजा क्लिक करीं.

भोजपुरी कविता 'ओझाई'

(आनन्द सन्धिदूतजी भोजपुरी के समसामयिक गीत-लेखन के एगो महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हईं. आज गांधी जयंती के अवसर पर व्यंग शैली में करेजा के भेद देव वाला उनकर लिखल एगो कविता 'ओझाई' के पहिला भाग रउआलो के सामने पेश करत तानी.) 'ओझाई' जै-जै कार मनाई गांधी महाराज के गोहराईं जवाहिर के बोलाईं मोलाना आज़ाद के किरिया खाईं कि, दोहाई भगवान बुद्ध के राजा अशोक के कि, जेकरा परताप के दुनियां में बाजे डंका धोजा फहराले कीरति के फिरल दोहाई साबरमती के पवनार के सदाकत आश्रम के कि, नांव लेत रोंआ फरफराय जीव गनगनाय कि, राजेन्दर परसाद सरदार पटेल ऊलल-भूलल छूटल छटकल नेता पुरनियां के देस-दुनियां के कि, जेकर खाईं ओकर जै-जै कार मनाईं जै हो गीता-कुरान-पुरान दोहाइ बार-बार गुरु की जै कि, मौलाना मोहम्मद अली तोड़ द दुसमन क नली कि तोहरा परताप से ऊ गोता लगाईं कि, समुन्दर सोख जाईं कि हिमाले हींग के माफिक उड़ाईं कि, पुरुबे रछपाल करें सियारदास बलिस्टर पछिमे लाला लजपत राय उतरे मदन मोहन मालबी मोती लाल नेहरू दखिने राजगोपालाचारी कि नांव लेत बकार न आवे काठ मार जाये कि, फिरल दोहाई सरोजिनी नायडू कमला नेहरू कस्तूरबा माई के कि,...

भोजपुरी: ई बोली न हमार परान ह

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आज भोजपुरी के सीमा ए.बी.सी.डी. (यानी आरा, बलिया, छपरा, देवरिया) के प्रचलित परिभाषा से बहुत आगे सरक गइल बा. आज त जहां-जहां दिदिया हिंदी के आना जाना बा वोजा अब इनकरो नाव लेवे वाला केहू-न-केहू जरूर बा. अइसन में इ भला कइसे हो सकेला कि जोना ब्लॉग जगत में हिंदी के तूती बोलअ ता वो बैठक में भोजपुरी के शामिल न कइल जाए. इहे सोच विचार के बाद ब्लॉग जगत में 'भोजपुरिया' के पदार्पण हो रहल बा.