बुधवार, नवंबर 08, 2006

भोजपुरी सम्मेलन: राज्य न रोटी

अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के 21वां सम्मेलन चार आ पांच नवम्बर के बिहार के सासाराम में सम्पन्न भइल. अच्छा लागल कि चलS चार गो भोजपुरिया भाई जुटलन आ समाज खातिर दुगो बढ़िया बात सोचलन. . .
संविधान के आठवीं अनुसूची में भोजपुरी के शामिल करेके मुद्दा पर आंदोलन के बात भइल... विश्वविद्यालयन में भोजपुरी के पढ़ाई से संबंधित बात प भी विचार भइल. यही मंच से एगो बड़ा ही अपरिपक्व विचार के भी हवा देहल गइल. अलग भोजपुरी प्रदेश के मांग कइल गइल.

अब इ त नइखे मालूम कि ई विचार केकरा दिमाग में पहिले आइल बाकि इतना त तय बा कि यह तरह के विचार देवे वाला लोगन के भोजपुरी प्रेम बड़ा सतही आ स्वार्थ प आधारित बा. नीक त नइखे लागत बाकि पूछे के मन करSता कि भोजपुरी राज्य लेके अइसन कौन जादू के छड़ी घूमा दी लो जेकरा से भोजपुरिया समाज के दु:ख दूर हो जाई.

सीधा-सीधा ई राजनीतिक स्टंट बा... जेकरा झांसा में अइला से भोजपुरिया समाज के बचे के बा. अगर येह तरह के मांग करे वाला लोग सही मायने में भोजपुरी आ भोजपुरिया समाज के भला चाहता त भूख, अशिक्षा आ बेरोजगारी जइसन समस्या हल करें के दिशा में कौनो ठोस कदम उठावे लो. ई न कि भोजपुरी के नाम पर मंच से फूहड़ गाना गवाके नीचे कुर्सी तुड़उल होखे.

यह संबंध में ई तर्क कि नया राज्य में एकर हल हो जाई... सरासर बहकावा बा. आज सबके मालूम बा कि आदिवासी कल्याण के नाम प बनल झारखंड राज्य में आदिवासी के केतना कल्य़ाण भइल?

बात साफ बा भोजपुरी प्रदेश के बेतुका मांग करे वाला लोग के नजर भोजपुरिया समाज के विकास पर ना भोजपुरिया लोगन के भारी संख्या के रूप में बड़हन वोटबैंक पर बा.

लिट्टीचोखा.com में पूर्व प्रकाशित

भोजपुरी सम्मेलन: हम नहीं सुधरेंगे

अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन के मौके प सासाराम में अभिनेता आ भोजपुरी गायक मनोज तिवारी के मंहग कार के लोग शीशा तुड़ देलहस।

रेलवे मैदान में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के समय भीड़ बेकाबू हो गइल आ पंडाल के तहस-नहस कर देहलस. कुर्सी त लोग तुड़बे कइसल जेकरा भेटाइल उ कुर्सियो उठा ले गइल. जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होखे लागल त मनोज तिवारी आपन कार्यक्रम स्थगित कर देहलन.

कार्यक्रम के उद्घाटन केंद्रीय मंत्री मीरा कुमार कइले रहनीं. शुरूआती में भोजपुरी के गीतन के मजगर माहौल बनल रहे बाकी भीड़ तब बेकाबू भइल जब 'हाथ में लेके पेप्सी कोला' अउर कुछ दोसर फूहड़ किसिम के गाना शुरू भइल. फूहड़ गाना शुरू होत मंत्री अ दोसर गणमान्य लोग ओजा से घसके लागल लो. जब वीवीआईपी घसक गइल लो पुलिसो सुस्त होके किनारे हो गइल.
फेर का रहे... दारू के नशा में मताइल कुछ लोग मंच चढ़के हुड़्दंगई शुरू क देहल. फेर बिगड़ गइल माहौल. यही हुड़दंग में मनोज के कार के शीशा कुंचा गइल.

अब लाख रुपिया के सवाल ई बा कि जौना आयोजन में देशभर के प्रबुद्ध (?) भोजपुरिया भोजपुरी के विकास आ सम्मान के बात करके खातिर जुटल रहल ह लो ओहिजा कलाकार से फूहड़ किसिम के गाना गवाके भोजपुरी के कौन आ केतना विकास भइल?

लिट्टीचोखा.com में पूर्व प्रकाशित

रविवार, दिसंबर 18, 2005

भोजपुरी फिलिम ‘घर दुआर’

ये घरी भोजपुरी फिल्मन के चहूंओर हरियरी बा. अइसन में एगो आउर फिल्म ‘घर दुआर’ ईहे शुक के मुम्बई में रिलीज भइल हS. अइसे बनारस अS गोरखपुर में इ फिलिम पहिलही रिलीज भ गइल रहे. बनारस के सिनेमाघर में लगातार पांच हप्ता तक चलके ‘घर दुआर’ के झंडा गड़ गइल बाS. गोरखपुर में भी एकर खुब चर्चा बा. इहां गौर करें वाला बात इ बा जहां बड़-बड़ बजट वाला बम्बईया फिलिम गिरत-ढिमिलाताS ओजा ‘घर दुआर’ के दुआर पS चकल्लस बा.
ई फिलिम रिलीज के अपना तीसरका किश्त में मुम्बई चहुंपल बाS. एजा भोजपुरिया लोगन ज्यादा आबादी वाला इलाका के शालीमार थियेटर, कैपिटल सिनेमा, नवरंग थियेटर आउर भिवंडी के गॅलेक्सी सिनेमा में एक साथ ई फिलिम रिलीज भइल हS. चौथका किश्त में ‘घर दुआर’ बिहार के दुआरी जाई. पहिले भोजपुरी फिलिम दु–तीन गो प्रिंट के साथ रिलीज हो जात रहे बाकी अब मामला सुधरल बा आउर निर्माता लोग पांच से दस प्रिंट बना के फिल्म रिलीज करS तारSन.
ई फिलिम के निर्माता-निर्देशक महेश पांडे मूलत: लेखक हउअन आउर टेलीविजन उद्योग में उनकर अच्छा-खासा नाम बा. उनकर खाता में ‘कहानी घर-घर की’, ‘कसौटी जिन्दगी की’ आउर ‘कुसुम’ जइसन हिट पारिवारिक सीरियल लिखे के श्रेय बा. ई फिलिम में भी देखनिहार के ऊ एगो लेखक के रूप में निराश नइखन कइले. हां, निर्देशन के लेहाज से फिलिम तनी कमजोर बा, बाकी पांडेजी के निर्देशक के रूप में ई पहिलका फिलिम हS एह चलते ई कमी के अनदेखी कईल जा सकSताS. यह उम्मीद के साथ कि अगिलका बार ‘घर दुआर’ जईसन बड़िया कहानी पर आउर बड़िया फिलिम बनाईंहें.
जहां कहानी ई फिलिम के मजबूत पक्ष बा ओहिजा संगीत बड़ा निराश करताS. संगीतकार सुरेश आनन्द के संगीत में मौलिकता के अभाव बा. सुरेशजी सहित सब भोजपुरिया संगीतकारलो से ई नम्र निवेदन बा कि रउआलो तनी सS आउर मेहनत करीं तS एने-वोने से संगीत टिपे के जरूरत नS पड़ी. ओईसे भी भोजपुरिया धरती लोकसंगीत के मामले में बड़ा धनी रहल बा. संगीतकार भाईलो तनी मिजाज से हो ओरिया नजर डाले लो.
हमरा पुरा उम्मीद बा कि अपना बजट से लेकर तमाम दोसर तरह के सीमा के तोड़के भोजपुरी सिनेमा बहुत ऊपर जाई. जरूरत ई बात के बा कि छौवो महाद्वीप में बसे वाला भोजपुरिया ‘घर दुआर’ जईसन प्रयास के समर्थन देस.

गुरुवार, अक्‍तूबर 27, 2005

बम्बई में छठ के धूम

ऐसे त भर दुनिया के हिंदुलो के तरह बिहारो में तमाम तरह के पर्व-त्योहार मनावल जाला बाकि एगो पर्व अइसन बा जेकरा के अगर बिहारी पर्व कहल जाव त गलत न होई... जी हां रउआ ठीक समझनी हम सूर्यषष्ठी यानी कि छठ के ही बात करतानी.
छठ के महातम त सबका खातिर बहुत बा बाकी हमनी जइसन परदेसी लो खातिर एकर महातम तनी ज्यादा ही बा. इहे कारण बा कि हमनी भले गांव घर से दूर बानी स... बाकी छठी मइया अपना अंचरा से कबो हमनी के दूर न कइली.
सन 2000 हजार में हम पहिला साल छठ के मौका पर घर से दूर रही... सच बताई .... भीतर से करेजा रोवत रहे. तब एगो संगी हमरा के एजा समंदर किनारे जुहू लेकर गइल. जइसे जुहू के नजदीक पहुंचे लगनीं... छठ वरतिया और उनकर संगी-साथी लो के भीड़ देखके मन धीरे-धीरे हलुक होखे लागल. जुहू बीच पर पहुंच के त एकदम से हम हरान रह गइनी... भीड़ लाखों में. बुझाते न रहे कि हम बिहार से कहीं बाहर बानी. चारों तरफ माहौल एकदम छठमय भइल रहे...
खैर... वोकरा बाद से त जब भी छठ में बम्बई में रहेके पड़ेला तब जुहू गइला बगैर त कुछ भुलाइल जइसन लागेला.
अबकी छठी मइया के कृपा से छठ में झारखंड अपना घरे जाएके मौका मिलतआ... घरे जाएके खुशी त बा... बाकी जुहू के छठ के भी हम ओतने मिस करतानी...
तअ एक बार जोर से बोलीं छठी मइया की जय!!!

गुरुवार, अक्‍तूबर 20, 2005

छठी मइया के गीत


पुजीला चरण तोहार
पुजीला चरण तोहार ऐ छठी मइया
दुखवा से करदअ उबार ऐ छठी मइया...





नरियवा
नरियवा जे फरेला घवद से ओ पर सुगा मेड़राय
सुगवा के मरबो धनुष से
सुगा गिरे मुरझाय
रोवें सुगा के सुगनिया
सुगा काहे मारल जाए
रखियों हम छठ के बरतिया आदित होइहें सहाय
दीनानाथ होइहें सहाय
सूरूज बाबा होइहें सहाय

(छठी मइया के इ गीत अगर भोजपुरिया लोक गायक मनोज तिवारी के आवाज़ में सुने के होखे त एहिजा क्लिक करीं.)

सोमवार, अक्‍तूबर 03, 2005

भोजपुरी भजन

सुरीला भोजपुरी भजन सुने के होखे त एहिजा क्लिक करीं.

भोजपुरी कविता 'ओझाई'

(आनन्द सन्धिदूतजी भोजपुरी के समसामयिक गीत-लेखन के एगो महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हईं. आज गांधी जयंती के अवसर पर व्यंग शैली में करेजा के भेद देव वाला उनकर लिखल एगो कविता 'ओझाई' के पहिला भाग रउआलो के सामने पेश करत तानी.)

'ओझाई'

जै-जै कार मनाई
गांधी महाराज के गोहराईं
जवाहिर के बोलाईं
मोलाना आज़ाद के किरिया खाईं
कि, दोहाई भगवान बुद्ध के
राजा अशोक के
कि, जेकरा परताप के दुनियां में बाजे डंका
धोजा फहराले कीरति के
फिरल दोहाई
साबरमती के
पवनार के
सदाकत आश्रम के
कि, नांव लेत रोंआ फरफराय
जीव गनगनाय
कि, राजेन्दर परसाद
सरदार पटेल
ऊलल-भूलल
छूटल छटकल
नेता पुरनियां के
देस-दुनियां के
कि, जेकर खाईं
ओकर जै-जै कार मनाईं
जै हो गीता-कुरान-पुरान
दोहाइ बार-बार
गुरु की जै
कि, मौलाना मोहम्मद अली
तोड़ द दुसमन क नली
कि तोहरा परताप से
ऊ गोता लगाईं
कि, समुन्दर सोख जाईं
कि हिमाले हींग के माफिक उड़ाईं
कि, पुरुबे रछपाल करें
सियारदास बलिस्टर
पछिमे लाला लजपत राय
उतरे मदन मोहन मालबी
मोती लाल नेहरू
दखिने राजगोपालाचारी
कि नांव लेत
बकार न आवे
काठ मार जाये
कि, फिरल दोहाई
सरोजिनी नायडू
कमला नेहरू
कस्तूरबा माई के
कि, तोहरा परताप से विजय पाईं
मुहें चन्नन लागे
लाज रहे
चढ़ बइठीं दुसमन के कपार पर
मंहगाई क झोंटा कबारीं
बेरोजगारी का लहंगा में आग लगाईं
गरीबी के नटी दबाईं
करेजा पर चढ़ बैइठीं
पूछीं-- बोल
हीत कि नात क
कुल क, खूंट क
अमेरिका क रूस क
पोरब कि पच्छिम क
बोल कहां क हइस
बामति हइस कि चुरइल
सी.आइ.ए. क करामात हइस
कि, के.जी.बी. क पाप हइस
कि, दोहाई बाबा बिनोबा के
कि, भूदान से मनबे
कि, सर्वोदय से
कि अंत्योदय से मनबे
कि जय समाजवाद के अखाड़ा
बाजे गल-बजउअल के नगाड़ा
कि, लगाईं बैकवर्ड के तड़ातड़ चटकना
चलाईं समग्र क्रांति के गरमेगरम सिंउठा
दोहाई हिरिया-जिरिया
ट्वंटी पाइंट प्रोगराम के
छू-ऊ-ऊ-ऊ!

क्रमश:
(दोसरका आउर अंतिम भाग अगिलका बार)

शनिवार, अक्‍तूबर 01, 2005

भोजपुरी: ई बोली न हमार परान ह

आज भोजपुरी के सीमा ए.बी.सी.डी. (यानी आरा, बलिया, छपरा, देवरिया) के प्रचलित परिभाषा से बहुत आगे सरक गइल बा. आज त जहां-जहां दिदिया हिंदी के आना जाना बा वोजा अब इनकरो नाव लेवे वाला केहू-न-केहू जरूर बा. अइसन में इ भला कइसे हो सकेला कि जोना ब्लॉग जगत में हिंदी के तूती बोलअ ता वो बैठक में भोजपुरी के शामिल न कइल जाए. इहे सोच विचार के बाद ब्लॉग जगत में 'भोजपुरिया' के पदार्पण हो रहल बा.

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